Saturday, 3 October 2020

न जाने किस की हमें उम्र भर तलाश रही

[9/27, 5:47 AM] Bansi Lal: न जाने किस की हमें उम्र भर तलाश रही

जिसे क़रीब से देखा वो दूसरा निकला
[9/27, 5:49 AM] Bansi Lal: •
किसी दूसरे को नीचा दिखाने के लिए नहीं, 

ख़ुद को ऊपर उठाने के लिए मेहनत करो।
[9/27, 5:50 AM] Bansi Lal: बनाना पड़ता था अक्सर बिगाड़ कर खुद को..

सो मैने रख ही दिया तोड़ ताड कर खुद को..!!
[9/27, 5:50 AM] Bansi Lal: किसी ने हँस कर बुलाया तो मरमिटे उस पर...

हमें किसी को परखने का फन नहीं आया!!!
[9/27, 5:51 AM] Bansi Lal: तुम चाहते हो तुमसे बिछड़कर भी खुश रहूँ..

यानि हवा भी चलती रहे और दीया जलें..!
[9/27, 5:52 AM] Bansi Lal: ... मनुष्य कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए!

- ईश्वरचंद्र विद्यासागर
[9/27, 5:53 AM] Bansi Lal: The less you know, 
the more you speak.

The more you know, 
the less you speak.
[9/27, 5:53 AM] Bansi Lal: मुझ पे लाज़िम है... मैं उसे देखूँ,

उसकी मरज़ी है वो जिधर देखे!!!
[9/27, 5:54 AM] Bansi Lal: सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी 

तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी 
[9/27, 5:54 AM] Bansi Lal: रुठ  तो  एक  दिन  सांसे  भी  जाती  है

फिर  अपनों  से  क्या  शिकायत.
[9/27, 5:55 AM] Bansi Lal: कमियाँ  ढूंढोगे  तो  मिल  ही  जायेगी  जनाब

रब  दे  बन्दे  हैं ' रब  तो  नहीं
[9/27, 7:18 AM] Bansi Lal: ख़ामोशियाँ पढ़ लिया करते थे जो कभी !!!!!!!

आज वही शब्दों के मानी ढूँढते हैं..............
[9/27, 7:25 AM] Bansi Lal: बड़ा मुश्किल होता है जवाब देना
जब कोई खामोश रहकर सवाल कर लेता है …
[9/27, 7:47 AM] Bansi Lal: नाज़ुक लगते थे जो हसीन लोग,

वास्ता पड़ा तो पत्थर निकले..!!
[9/27, 10:56 AM] Bansi Lal: जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन बा रंजिश,
बहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है
सुनाई देती है जिसकी धड़कन,
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है।

{मुझ गरीब (मिस्कीन) को रंजिश से भरी इन निगाहों से ना देखो, क्योंकि मेरा बेचारा दिल जुदाई (हिजरा) के मारे यूँ ही बेहाल है।}

Friday, 25 September 2020

*संगठन*

*संगठन*
 
एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था l उसको सभी जानते थे, बड़ा मान सम्मान मिलता था lअचानक किसी कारण वश वह निश्क्रिय रहने लगा , मिलना - जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया।

कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में , उस संगठन के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया । मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।

दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया और फिर से शांत बैठ गया।

मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने संगठन के मुखिया के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुई लकड़ी की आग की लौ धीरे धीरे कम हो रही है। कुछ देर में आग बिल्कुल बुझ गई। उसमें कोई ताप नहीं बचा। उस लकड़ी से आग की चमक जल्द ही बाहर निकल गई।

कुछ समय पूर्व जो उस लकड़ी में उज्ज्वल प्रकाश था और आग की तपन थी *वह अब एक काले और मृत टुकड़े से ज्यादा कुछ शेष न था।* 

इस बीच.. दोनों मित्रों ने एक दूसरे का बहुत ही संक्षिप्त अभिवादन किया, कम से कम शब्द बोले। जानें से पहले मुखिया ने अलग की हुई  बेकार लकड़ी को उठाया और फिर से आग के बीच में रख दिया। वह लकड़ी फिर से सुलग कर लौ बनकर जलने लगी और चारों ओर रोशनी तथा ताप बिखेरने लगी।

जब आदमी, मुखिया को छोड़ने के लिए दरवाजे तक पहुंचा तो उसने मुखिया से कहा मेरे घर आकर मुलाकात करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद । आज आपने बिना कुछ बात किए ही एक सुंदर पाठ पढ़ाया है कि *अकेले व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता, संगठन का साथ मिलने पर ही वह चमकता है और रोशनी बिखेरता है संगठन से अलग होते ही वह लकड़ी की भाँति बुझ जाता है।*

मित्रों *संगठन से ही हमारी पहचान* बनती है इसलिए संगठन हमारे लिए सर्वोपरि होना चाहिए । संगठन के प्रति हमारी निष्ठा और समर्पण *किसी व्यक्ति के लिए नहीं,* उससे जुड़े विचार के प्रति होनी चाहिए । 
संगठन किसी भी प्रकार का हो सकता है , (पारिवारिक , सामाजिक, व्यापारिक शैक्षणिक संस्थान, औधोगिक संस्थान, राजनैतिक , सांस्कृतिक इकाई , आदि ,)
*संगठनों के बिना मानव जीवन अधूरा है* , अतः हर क्षेत्र में जहाँ भी रहें संगठित रहें -

Tuesday, 15 September 2020

दिल है क़दमों पर किसी के सर झुका हो या न हो

[9/4, 11:03 AM] Bansi Lal: #सुब्ह🌹 #दुआ 🙏

दिल है क़दमों पर किसी के सर झुका हो या न हो 

बंदगी तो अपनी फ़ितरत है ख़ुदा हो या न हो ।
[9/4, 11:12 AM] Bansi Lal: क़रीब   रहने   के   लिए...

थोड़ी   सी   दूरी   ज़रूरी    हैं...!
[9/4, 11:17 AM] Bansi Lal: किमत मुनासिब होना चाहिए ,

यहां एहसास , विश्वास , इज़्ज़त ,ईमान 
सब बिकने को तैयार है
[9/5, 7:45 PM] Bansi Lal: किसी भी रिश्ते की खूबसूरती उस दिन से ही ख़त्म हो जाती है

 जिस दिन से अधिकार की जगह अहंकार आ जाता .........!!!
[9/5, 7:49 PM] Bansi Lal: अगर कोई "इंसान" आपको एक
ही "सबक" दो बार 
सिखाए..

तो यकीन मानिए, गलती उस 
इंसान की नहीं, 
आपकी 
है!
[9/5, 7:59 PM] Bansi Lal: हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालूम हुआ....

अनकही बात को किस तरहा सुना जाता है.!!!
[9/7, 9:05 AM] Bansi Lal: एक पत्थर की भी तक़दीर सँवर सकती है

शर्त ये है कि सलीक़े से तराशा जाए
[9/7, 9:06 AM] Bansi Lal: बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिन

वो जानता था कि है एहतिमाम किस के लिए
[9/7, 9:07 AM] Bansi Lal: वो एक दिन जो तुझे सोचने में गुज़रा था

तमाम उम्र उसी दिन की तर्जुमानी है
[9/7, 9:09 AM] Bansi Lal: सदियों से ज़माने का ये अंदाज़ रहा है

साया भी जुदा हो गया जब वक़्त पड़ा है
[9/7, 9:12 AM] Bansi Lal: वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए,

उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है...
[9/7, 9:13 AM] Bansi Lal: वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए,

उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है...
[9/7, 9:16 AM] Bansi Lal: जिस की ख़ातिर मैं भुला बैठा था अपने आप को

अब उसी के भूल जाने का हुनर भी देखना
[9/7, 9:20 AM] Bansi Lal: वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था

पानी पानी कहते कहते डूब गया है
[9/7, 9:25 AM] Bansi Lal: एक आंसू कोरे काग़ज़ पर गिरा....

और अधूरा ख़त मुकम्मल हो गया....
[9/7, 8:52 PM] Bansi Lal: हमे ये दुःख है कि ज़िंदगानी बग़ैर उसके गुज़ारनी है 

मगर तसल्ली की बात ये है वो अब हमारा न हो सकेगा
[9/7, 8:56 PM] Bansi Lal: बरसो बीत जाते हैं दस्तक देते हुए
.
.
पर कुछ दरवाजे कभी नहीं खुलते
[9/7, 9:00 PM] Bansi Lal: तक़दीर की तरकश मे चाहत के तीर इतने भर दीऐ हमने 

और हमें ही पता नही निशाने पर हम खुद  है...!!
[9/7, 9:02 PM] Bansi Lal: हम सुधर गए तो उन का क्या होगा 

जिनको हमारी शरारतें अच्छी लगती है
[9/7, 9:03 PM] Bansi Lal: अपनी किस्मत को कभी दोष मत‌ दीजिए, इंसान के रूप में जन्म मिला है, 

ये किस्मत नहीं तो और क्या है।

तुम थोड़ा नज़रअंदाज़ तो कर के देखो

[9/8, 8:27 AM] Bansi Lal: तुम थोड़ा नज़रअंदाज़ तो कर के देखो

हम तुम्हें पहचानने से ही इनकार कर देंगे।
[9/8, 8:28 AM] Bansi Lal: अकेले ही तय करने होते हैं कुछ सफर..!

हर सफर पर हमसफर नही होते..!!
[9/8, 8:28 AM] Bansi Lal: मेरा लिखना मुझे खुशी देता है 
इसलिए ये तुम्हारा एक फर्ज है कि तुम इसे पढ़ के मुस्कुरा दिया करो !!
[9/8, 8:29 AM] Bansi Lal: ताउम्र चलने वाली दोस्ती थी हमारी 

अगर अहं बीच में न आता...
[9/9, 9:05 AM] Bansi Lal: तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है

तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
[9/9, 9:06 AM] Bansi Lal: वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था

पानी पानी कहते कहते डूब गया है
[9/9, 9:06 AM] Bansi Lal: बहुत वक़्त में बने रिश्ते को भी टूटने के लिए 

एक लम्हे की ज़रूरत होती है!
[9/9, 9:08 AM] Bansi Lal: ताक़त आवाज़ में नहीं अपने विचारो में रखो

 क्योंकि फ़सल बारिश से होती है, बाढ़ से नहीं !!!
[9/9, 4:01 PM] Bansi Lal: बहुत ज़ोर से हँसे थे हम .....
बड़ी मुद्दतों के बाद आज फ़िर कहा किसी ने....

मेरा ऐतबार कीजिये....!
[9/10, 8:11 AM] Bansi Lal: वहाँ से एक पानी की बूँद ना निकल सकी फ़राज़,,,,

 तमाम उम्र जिन आँखो को हम झील कहते रहे !!
[9/10, 8:12 AM] Bansi Lal: "Never try to teach a pig to sing; 

it wastes your time and it annoys the pig."
[9/10, 8:15 AM] Bansi Lal: The real art of conversation is not to say the right thing at the right time…

but also to leave the wrong thing unsaid at the most tempting moment..
[9/10, 8:21 AM] Bansi Lal: "जिंदगी में उम्मीद का जुआ तो खेलना ही पड़ता है"
[9/10, 8:21 AM] Bansi Lal: बोलने का हक़ छीना जा सकता है

मगर ख़ामोशी का नहीं...!!
[9/11, 10:11 AM] Bansi Lal: रोज बदलते है हम
फिर भी
कहां बदलते है हम..
[9/11, 10:12 AM] Bansi Lal: तकदीर-ए-मोहब्बत थी.. मर मर के जिए जाना

जीना ही मुकद्दर था.. हम मर के भी क्या करते...
[9/11, 10:13 AM] Bansi Lal: People are like music, some speak the truth and others are just noise.
[9/11, 8:07 PM] Bansi Lal: लक्ष्य सही होना चाहिए

काम तो दीमक भी दिन रात करती है, 

पर वो निर्माण नहीं विनाश करती है।
[9/14, 12:09 PM] Bansi Lal: अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाये कारवाँ .........

वीरानियाँ तो , सब मेरे दिल में उतर गयीं  !
[9/14, 12:09 PM] Bansi Lal: भूलने वाली बात "याद" हैं...

इसलिए तो संबंघो में "विवाद" हैं.
[9/14, 12:10 PM] Bansi Lal: किसी शाम सा था तेरा मेरी ज़िन्दगी में ठहरना 

बेशक जरा सा मगर बेहद खुबसूरत
[9/14, 12:14 PM] Bansi Lal: सूखे पेड़ पर बारिश में भीगता बैठा रहा परिंदा ...

 खुश था,  की अब पेड़ हरा होगा ..
[9/14, 12:15 PM] Bansi Lal: आत्मा जो चाहती है वो पा लेती है .
[9/15, 7:44 AM] Bansi Lal: प्रशंसा अगर हो रही हो तो

तो प्रसन्न नहीं, सावधान रहने की ज़रूरत है
[9/15, 7:45 AM] Bansi Lal: ________

राह भूल जाने के भय से यदि
लंबी दूरीयाँ तय नहीं करोगे तुम

तो तुम कभी नहीं जान‌ पाओगे
कि जिस नदी को पार करना जीवनभर असंभव लगता रहा तुम्हें

एक निश्चित दूरी पर चलकर
उसपर‌ रस्सियों का एक पुल भी था ।।
[9/15, 7:48 AM] Bansi Lal: नज़रिए की कमज़ोरी चरित्र की कमज़ोरी बन जाती है।
[9/15, 7:48 AM] Bansi Lal: "असत्य अधिक आकर्षक होता है।"
[9/15, 7:51 AM] Bansi Lal: रिश्तों की डोरियां, कसमों के 

धागे से नही..

कोशिशों की रेशम से बंधनी चाहिये...!
[9/15, 7:51 AM] Bansi Lal: इससे पहले कि वो तुझको तुम से तू करदे ,

ये मशवरा है मेरा .. ख़त्म गुफ्तगू करदे ....
[9/15, 7:54 AM] Bansi Lal: उनके वास्ते हम जाने कितने काम बेशुमार कर गए

मामूली सा काम हमने कहा तो नजरअंदाज कर गए

ज़ाहिर में जो रस्ता सीधा लगता हो उस पर

[8/31, 7:44 AM] Bansi Lal: बात की गहराई में उतरे बिना प्रतिक्रिया दिखाना और बात का अर्थ समझे बिना उसको कोई रंग दे देना सदा हानिकारक होता है ॥

“सचेत रहें”
[8/31, 7:46 AM] Bansi Lal: ज़ाहिर में जो रस्ता सीधा लगता हो उस पर 
अपने पैर जमाए रखना कितना मुश्किल है...

आवाज़ों की भीड़ में इतने शोर-शराबे में 
अपनी भी इक राय रखना कितना मुश्किल है..
[8/31, 7:51 AM] Bansi Lal: रूह के रिश्तों की यही खासियत रही है....
महसूस हो ही जाती है जो बात अनकही है !!
[8/31, 7:52 AM] Bansi Lal: कोई वजह नही पुछेगा
पर इल्जाम बेशुमार लगेगें
सब्र करना ....
जवाब देने में वक़्त जाया न करना !
[8/31, 9:26 PM] Bansi Lal: अभी इतने अल्फ़ाज़ नही लिखे हमने 
जितना तुमने मुझे समझ लिया है ..... !!
[8/31, 9:26 PM] Bansi Lal: जिंदगी में एक दोस्त ऐसा भी होना चाहिए ,

जो बिना मतलब हालचाल पूछता रहता हो..!!!
[8/31, 9:27 PM] Bansi Lal: तुम्हारा मुझको ये कहना तुम्हारे साथ मैं हूँ ना 

किसी बंजर पे बारिश की तरह अहसास लगता है ।।
[8/31, 9:28 PM] Bansi Lal: अपना सा लगता है तेरा नजरअंदाज करना 

खुशी है कि तू अब भी पहचानता है हमे...
[8/31, 9:29 PM] Bansi Lal: पुरानी शाखों से पूछो जीना कितना मुश्किल है, 

नये पत्ते तो बस अपनी अदाकारी में रहते हैं!

“All truth passes through three stages.

[8/20, 8:14 AM] Bansi Lal: “All truth passes through three stages.

 First, it is ridiculed.

 Second, it is violently opposed.

 Third, it is accepted as being self-evident.”
[8/21, 12:17 PM] Bansi Lal: ख़ामोशी में चाहे जितना बेगाना-पन हो ,

लेकिन इक आहट जानी-पहचानी होती है !
[8/22, 7:46 AM] Bansi Lal: मूड हो जैसा वैसा मंज़र होता है

मौसम तो इंसान के अंदर होता है
[8/22, 7:48 AM] Bansi Lal: संयम संस्कृति का मूल है!

विलासिता निर्बलता और चाटुकारिता के वातावरण में न तो संस्कृति का उद्भव होता है और न विकास!
[8/22, 7:50 AM] Bansi Lal: दरिया थे जितने ग़म के वो मुझमें उतर गए...

मैं   चीखता   रहा.. कि   समंदर   नहीं   हूं   मैं...
[8/23, 8:35 AM] Bansi Lal: चीर कर दिल को दिल से निकली थी

आह को कामयाब होना था
[8/23, 8:49 AM] Bansi Lal: मूर्खता से पैदा हुआ आत्मविश्वास सबसे बड़ा होता है!
[8/23, 8:50 AM] Bansi Lal: गिरे हुए आदमी को उत्साहवर्धक भाषण देने की अपेक्षा, 
सहारे के लिए हाथ देना चाहिए!
[8/26, 10:19 AM] Bansi Lal: सुना है हमें वो भुलाने लगे हैं

तो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं
[8/26, 10:20 AM] Bansi Lal: हर शख़्स दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ़,

फिर ये भी चाहता है उसे रास्ता मिले...
[8/26, 10:28 AM] Bansi Lal: "बुराई की खासियत, कभी हार नहीं मानती

और अच्छाई की खासियत, वो कभी हारती नहीं",,
[8/26, 10:29 AM] Bansi Lal: हमने ख़ुद अपना घर जलाया है,
ये हुनर मुश्किलों से आया है.

फिर हमें डूबना है साहिल पर,
फिर उसे ना-ख़ुदा बनाया है.
[8/27, 8:51 AM] Bansi Lal: ज़रूरत के पाँव चादर से बाहर निकल जाते है..

ढंकते ढांकते पाँव ज़िन्दगी
 यूँ....ही गुज़र जाती है !
[8/27, 8:06 PM] Bansi Lal: हमको अच्छा नहीं लगता कोई हमनाम तेरा

कोई तुझसा हो तो फिर नाम भी तुझ सा रखे।
[8/27, 8:06 PM] Bansi Lal: जो जाने के बहाने ढूंढते हैं ,
.
.
उनको दरवाजे तक छोड़कर आना चाहिए
[8/27, 8:10 PM] Bansi Lal: वक़्त मांगा तो वो हस के बोले,,
,
,वक़्त लगता है वक़्त पाने को,....!!
[8/29, 9:35 AM] Bansi Lal: सुना है मिट्टी पानी का अज़ल से एक रिश्ता है,
जड़ें मिट्टी में लगती हैं,
जड़ों में पानी रहता है...
[8/29, 9:37 AM] Bansi Lal: इश्क ने हमसे कुछ ऐसी साजिशें रची हैं,

मुझमें मैं नहीं हूँ अब बस तू ही तू बसी है
[8/29, 9:39 AM] Bansi Lal: शब्द तो यदा-कदा चुभते ही रहते हैं सबके, 

पर जब मौन चुभ जाए किसी का तो  
बड़ी वेदना होने लगती है। |
[8/29, 10:01 AM] Bansi Lal: हल्के - हल्के बढ़ रही हैं चेहरे की लकीरें, 

नादानी और तजुर्बे में बटवारा हो रहा है..!!
[8/29, 10:02 AM] Bansi Lal: तुम वजह तो ज़ाहिर करो 
नाराज़गी की ....
मनाने का ज़िम्मा हम उठा लेंगे !
[8/29, 10:12 AM] Bansi Lal: लाजिम है अब उम्र भर सफर मेरा....
अपनी मंजिल जो मैंनें तुम्हें बनाया है !

"चिता" और "चिंता" में केवल एक बिंदु का ही फ़र्क़ है।

[8/18, 8:04 AM] Bansi Lal: "चिता" और "चिंता" में केवल एक बिंदु का ही फ़र्क़ है।

"चिता" निर्जीव को जलाती है,।
 और "चिंता" जीवित को जलाती है ।
[8/18, 8:19 AM] Bansi Lal: ये शहर वो है कि कोई ख़ुशी तो क्या देता

किसी ने दिल भी दुखाया नहीं बहुत दिन से!!!
[8/18, 8:29 AM] Bansi Lal: कितनी आसानी से मशहूर किया है ख़ुद को

मैं ने अपने से बड़े शख़्स को गाली दे कर
[8/18, 8:30 AM] Bansi Lal: आइना देख कर तसल्ली हुई
 
हम को इस घर में जानता है कोई
[8/18, 8:32 AM] Bansi Lal: "गूँजती वादी में आवाज़ अभी बाक़ी है

तार टूटे हैं तो क्या साज़ अभी बाक़ी है
[8/18, 8:33 AM] Bansi Lal: रिहा कर दे क़फ़स की क़ैद से घायल परिंदे को

किसी के दर्द को इस दिल में कितने साल पालेगा...
[8/18, 8:36 AM] Bansi Lal: फ़ासले बहुत हो चुके हैं दरमियाँ,

मेरी ख़ामोशी भी उसे अब शोर लगती है...
[8/18, 8:39 AM] Bansi Lal: गले से लगते ही जितने  गिले थे ...भूल गए

वरना याद थीं ...हम को शिकायतें क्या क्या
[8/19, 4:34 AM] Bansi Lal: सबसे पहले दूर होने वालों में वही शामिल थे।

शोर जिन्होंने बहुत मचाया हुआ था.......
[8/19, 4:42 AM] Bansi Lal: सबसे पहले दूर होने वालों में वही शामिल थे।

शोर जिन्होंने अपनेपन का बहुत मचाया हुआ था.......
[8/19, 5:42 AM] Bansi Lal: एक बाजार है ये दुनिया, सौदा संभलकर कीजिये...! 

मतलब के  होज़रे में, बेशुमार दिल मिलते है....!!
[8/19, 5:43 AM] Bansi Lal: वो भी दो क़दम साथ चल के थक सा गया 

आख़री छोर तक जो साथ आने वाला था
[8/19, 5:47 AM] Bansi Lal: मुझे सुखे हुए पत्तों ने सीखाया है

बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा देंगे!!
[8/19, 7:36 PM] Bansi Lal: बुद्धिमान लोग हमेशा स्वेच्छा से ही सही रास्ते पर चलते हैं।
[8/19, 7:42 PM] Bansi Lal: फर्क होता है अकेले रहने में 

और अकेले हो जाने में

डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

 [8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...