एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ....
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था .... उसी समय एक
चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ....
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने
फन से ज़हर निकाला .... तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था
उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बुंदे खाने में गिर गई ....
किसी को कुछ पता नहीं चला .... फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने
आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते हीं मौत हो गयी .. अब जब राजा
को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला .... तो ब्रम्ह-हत्या होने से उसे
बहुत दुख हुआ .... ....
ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया ..
कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय ....
वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....
बहुत दिनों तक यह मामला यमराज की फाईल में अटका (Pending) रहा ....
फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए ....
और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ....
तो उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया .... पर रास्ता बताने के
साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि देखो भाई ....
" जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में
जहर देकर मार देता है ...."
बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे .... उसी समय यमराज ने
फैसला (decision) ले लिया .... कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल .... इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ....
यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों .... ?? जब कि उन मृत ब्राह्मणों
की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका (role) भी नही थी ....
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो .... जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं ....
तब उसे बड़ा आनंद मिलता हैं .... पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना
तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला ....
ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ....
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस
महिला को जरूर आनंद मिला .... इसलिये राजा के उस अनजाने
पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ....
बस इसी घटना के तहत आज तक जब भी कोई व्यक्ति ....
जब किसी दुसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से (बुराई) करता हैं ....
तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा .... उस बुराई करने वाले के खाते
में भी डाल दिया जाता हैं ....
अक्सर हम जीवन में सोचते हैं .... कि हमने जीवन में ऐसा कोई पाप
नही किया .... फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया .... ??
ये कष्ट और कहीं से नही .... बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण ....
उनके पाप-कर्मो से आया होता हैं .... जिनको यमराज बुराई करते ही
हमारे खाते में ट्रांसफर कर देते हैं ....
इसलिये आज से ही संकल्प कर लो .... " कि किसी के भी पाप-कर्मों का
बखान बुरे भाव से कभी नही करना " .... " यानी किसी की भी बुराई या
चुगली कभी नही करनी हैं " .... लेकिन यदि फिर भी हम ऐसा करते हैं ....
" तो हमें ही इसका फल जरूर भुगतना पड़ेगा .... बस आज नहीं हो कल " .... !!!!
Friday, 22 June 2018
पाप कर्म:
Friday, 15 June 2018
पुजारी और नाई:
पुजारी और नाई
(जो बाल काँटता है) दोनों मित्र थे|
💫✨💥
नाई हमेशा पुजारी से कहता है, ईश्वर हमेशा ऐसा क्यों करता है, वैसा क्यों करता है ? यहाँ बाढ़ आ गई, वहाँ सूखा हो गया, यहाँ एक्सीडेंट हुआ, यहाँ भुखमरी चल रही है, नौकरी नहीं मिल रहीं हमेशा लोगों को ऐसी बहोत सारी परेशानियां बताता रहता है | तो उस पुजारी ने उसे एक इंसान से मिलाया | जो भिखारी था, बाल बहोत बढ़े थे, दाढ़ी भी बहोत बढ़ी थी और उस नाई को कहां देखो उस इंसान को जिसके बाल बढ़े हुए हैं, दाढ़ी भी बहोत बढ़ी हुई है | तुम्हारे होतें हुए ऐसा क्यों है ?
नाई बोला अरे उसने मेरे साथ संपर्क ही नहीं किया | पुजारी ने भी बताया यही तो बात है |
जो लोग ईश्वर से संपर्क करते हैं उनका दुःख खतम हो जाता है | लोग संपर्क ही नहीं करतें और कहतें हैं दुःख क्यों है ?
जो संपर्क करेगा वो दुःख से मुक्त हो जाएगा
Monday, 11 June 2018
काफिला:
[5/28, 11:36 AM] Bansi Lal: मेरी समंदर से मुहब्बत, कुछ उसके साहिलों की है |
रेत के हर जर्रे में कहानी, कितने ही काफिलों की है | 🍃🌸🍃
[6/2, 8:57 AM] Bansi Lal: "एक एक कर इतनी कमियां निकाली लोगों ने मुझमें,
की अब बस "खुबियां" ही रह गयी हैं मुझमें...
🍃🍂🍃
[6/3, 6:24 AM] Bansi Lal: रुलाये बगैर तो प्याज भी नही कटता,
फिर ये तो #जिदंगी है ।
💐💐💐
[6/3, 6:25 AM] Bansi Lal: बहुत उदास था उस दिन मगर हुआ क्या था
हर एक बात भली थी तो फिर बुरा क्या था
💐💐💐
[6/3, 6:25 AM] Bansi Lal: तेरे वादों पे कहाँ तक मेरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मेरी आस टूट जाए
💐💐💐
[6/3, 6:26 AM] Bansi Lal: “जलो वहां जहाँ जरूरत हो, उजालों में चिरागों के मायने नहीं होते..”
💐💐💐
[6/3, 6:28 AM] Bansi Lal: न पूछिए कि शब-ए-हिज्र हम पे क्या गुज़री
तमाम रात जले शम-ए-अंजुमन की तरह
💐💐💐
[6/3, 6:36 AM] Bansi Lal: इतना तो मुझे याद है कुछ उस ने कहा था
क्या उस ने कहा था ये मुझे याद नहीं है
💐💐💐
[6/3, 6:38 AM] Bansi Lal: आइना देख ज़रा क्या मैं ग़लत कहता हूँ
तू ने ख़ुद से भी कोई बात छुपा रक्खी है
💐💐💐
[6/4, 8:06 AM] Bansi Lal: महफ़िल में जो हमे दाद देने से कतराते हैं,
सुना है तन्हाइयों में वो हमारी शायरी गुनगुनाते हैं...
💐💐💐
[6/4, 10:17 AM] Bansi Lal: बाहर सारे मैदाँ जीत चुका था वो
घर लौटा तो पल भर में ही टूटा था
💐💐💐
[6/5, 6:44 AM] Bansi Lal: मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने
तू समझता है मुझे तुझ से गिला कुछ भी नहीं
💐💐💐
[6/6, 10:43 AM] Bansi Lal: उस को देखा तो ये महसूस हुआ
हम बहुत दूर थे ख़ुद से पहले
💐💐💐
[6/6, 10:44 AM] Bansi Lal: ये शहर-ए-तिलिस्मात है कुछ कह नहीं सकते
पहलू में खड़ा शख़्स फ़रिश्ता कि बला है
💐💐💐
[6/6, 10:45 AM] Bansi Lal: दीवार ओ दर झुलसते रहे तेज़ धूप में
बादल तमाम शहर से बाहर बरस गया
💐💐💐
[6/6, 8:25 PM] Bansi Lal: ज़िंदगी इक सवाल है जिस का जवाब मौत है
मौत भी इक सवाल है जिस का जवाब कुछ नहीं
💐💐💐
[6/7, 10:58 AM] Bansi Lal: जिन्दगी तेरी भी, अजब परिभाषा है..
सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है...
💐💐💐
[6/7, 12:45 PM] Bansi Lal: रिश्तों में ना रखा करो, हिसाब नफ़े और नुकसान का।
ज़िन्दगी की पाठशाला में, गणित का कमज़ोर होना अच्छा है
💐💐💐
Friday, 1 June 2018
मेहनत जी आदत:
*💐~ मेहनत की आदत ~💐*
एक बार की बात है, एक आदमी जो पेशे से दुकानदार था बड़ा दुखी रहता था क्यूंकि उसका बेटा बहुत आलसी और गैरजिम्मेदार था वह हमेशा दोस्तों के साथ मस्ती करता रहता था ।
जबकि वह अपने पुत्र को एक मेहनती इंसान बनाना चाहता था। वह काफ़ी बार अपने पुत्र को डाँटता था लेकिन पुत्र उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था ।
एक दिन उसने अपने पुत्र से कहा कि आज तुम घर से बाहर जाओ और शाम तक कुछ अपनी मेहनत से कमा के लाओ नहीं तो आज शाम को खाना नहीं मिलेगा ।
लड़का पहुत परेशान हो गया वह रोते हुए अपनी माँ के पास गया और उन्हें रोते हुए सारी बात बताई माँ का दिल पसीज गया और उसने उसे एक सोने का सिक्का दिया कि जाओ और शाम को पिताजी को दिखा देना ।
लड़के ने वैसे ही किया शाम को जब पिता ने पूछा कि क्या कमा कर लाए हो तो उसने वो सोने का सिक्का दिखा दिया ।
पिता यह देखकर सारी बात समझ गया । उसने पुत्र से वो सिक्का कुएँ मे डालने को कहा, लड़के ने खुशी खुशी सिक्का कुएँ में फेंक दिया ।
अगले दिन पिता ने माँ को अपने मायके भेज दिया और लड़के को फिर से कमा के लाने को कहा । अबकी बार लड़का रोते हुए बड़ी बहन के पास गया तो बहन ने दस रुपये दे दिए ।
लड़के ने फिर शाम को पैसे लाकर पिता को दिखा दिए । पिता ने कहा कि जाकर कुएँ में डाल दो लड़के ने फिर डाल दिए।
अब पिता ने बहन को भी उसके ससुराल भेज दिया । अब फिर लड़के से कमा के लाने को कहा ।
अब तो लड़के के पास कोई चारा नहीं था वह रोता हुआ बाजार गया और वहाँ उसे एक सेठ ने कुछ लकड़ियाँ अपने घर ढोने के लिए कहा और कहा कि बदले में दो रुपये देगा । लड़के ने लकड़ियाँ उठाईं और सेठ के साथ चल पड़ा रास्ते में चलते चलते उसके पैरों में छाले पड़ गये और हाथ पैर भी दर्द करने लगे ।
शाम को जब पिताजी को दो रुपये दिखाए तो पिता ने फिर कहा की बेटा कुएँ मे डाल दो तो लड़का गुस्सा होते हुए बोला कि मैने इतनी मेहनत से पैसे कमाए हैं और आप कुएँ में डालने को बोल रहे हैं।
पिता ने मुस्कुराते हुए कहा कि यही तो मैं तुम्हें सिखाना चाहता था ,तुमने सोने का सिक्का तो कुएँ में फेंक दिया लेकिन दो रुपये फेंकने में डर रहे हो क्यूंकि ये तुमने मेहनत से कमाए हैं ।
अबकी बार पिता ने दुकान की चाबी निकाल कर बेटे के हाथ में दे दी और बोले कि आज वास्तव में तुम इसके लायक हुए हो, क्यूंकि आज तुम्हें मेहनत का अहसास हो गया है l
🙏🙏
Sunday, 27 May 2018
परेशान:
गिले शिकवे कहाँ तक होंगे आधी रात तो गुज़री
परेशाँ तुम भी होते हो परेशाँ हम भी होते हैं
🍂🍃🍂
दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता,
तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता...
🍂🍃🍂
[5/16, 10:07 AM] Bansi Lal: जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़
उन का दावा है कि वो अस्ल ख़ुदा वाले हैं
🍃🍂🍃
[5/16, 10:09 AM] Bansi Lal: बातों बातों में ही उनवान बदल जाते हैं
कितनी रफ़्तार से इंसान बदल जाते हैं
🍃🍂🍃
[5/18, 7:09 AM] Bansi Lal: नई हवाओँ की सोहबत बिगाड़ देती है,
कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती है,
जो जुर्म करते है इतने बुरे नहीं होते,
सजा ना देके अदालत बगाड़ देती हैं.
🍂🍃🍂
[5/18, 7:10 AM] Bansi Lal: मैं जिस के हाथ में इक फूल दे के आया था
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है
🍃🍂🍃
[5/18, 7:14 AM] Bansi Lal: जब से बाज़ू हटा लिया तुमने,
सर के नीचे सवाल सोते हैं...
🍂🍃🍂
[5/18, 8:08 PM] Bansi Lal: पाँव में ज़ंजीर काँटे आबले
और फिर हुक्म-ए-सफ़र है क्या करूँ
🍃🍂🍃
[5/18, 8:09 PM] Bansi Lal: आबला : छाला
[5/18, 8:10 PM] Bansi Lal: ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूँ
काश तुझ को भी इक झलक देखूँ
🍂🍃🍂
[5/18, 8:11 PM] Bansi Lal: हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
🍃🍂🍃
[5/18, 8:13 PM] Bansi Lal: नफरत खुलकर और मुहब्बत छिपकर करते हैं !
हम अपनी ही बनाई दुनियां से कितना डरते है।
🍂🍃🍂
[5/19, 10:35 PM] Bansi Lal: सुरमे की तरह पीसा है हमें हालातों ने,
तब जा के चढ़ें हैं लोगों की निगाहों में..
🍂🍃🍂
[5/19, 10:40 PM] Bansi Lal: सूरज ढला तो
कद से ऊँचे हो गए साये,
कभी पैरों के नीचे देखीं थी,
यहीं परछाइयां हमने...
🍂🍃🍂
[5/21, 2:24 PM] Bansi Lal: है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम
मैं ये क्यूँ पूछूँ कब मिलेंगे आप
🍃🍂🍃
[5/21, 2:26 PM] Bansi Lal: वक़्त से पेहले हादसों से लढा हु,
में अपनी उम्र से कई साल बड़ा हु..
🍃🍂🍃
[5/21, 2:27 PM] Bansi Lal: तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
कमाल ये है कि, फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
🍂🍃🍂
[5/22, 6:39 AM] Bansi Lal: भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में
उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं
🍃🍂🍃
[5/22, 6:43 AM] Bansi Lal: सब शिकवे हमसे कागज़ पे उतारे ना जाएंगे..
कहीं पढ़ने वाला तुम्हें बददुआ ना दे दे,,,!
🍂🍃🍂
[5/22, 6:44 AM] Bansi Lal: देख कर उन को ये अंदाज़ा हुआ
होगी ऐसी ही क़यामत कम से कम
🍃🍂🍃
[5/22, 6:45 AM] Bansi Lal: जिंदगी की रेस में जो लोग आपको ‘दौड़’ कर नहीं हरा पाते
वही आपको ‘तोड़’ कर हराने की कोशिश करते
हैं......
🍂🍃🍂
[5/23, 7:05 AM] Bansi Lal: चले कुछ कदम , थमे पल दो पल , पीछे मुड़कर देखा , कुछ सोचा , फिर पुन: चल पड़े , धीमे धीमे कदम धरते , अपने गंतव्य की ओर!!!!!
🍂🍃🍂
[5/24, 11:08 AM] Bansi Lal: छीन लेते हैं उसे भी तो अयादत वाले
दुख का इक पल भी तो मेरा नहीं होने पाता
🍂👌🍂
[5/24, 11:11 AM] Bansi Lal: डूबे हुए जहाज़ पे क्या #तब्सिरा करें,
ये हादिसा तो सोच की गहराई ले गया ....
🍂🍃🍂
#समीक्षा
[5/24, 11:16 AM] Bansi Lal: डूबे हुए जहाज़ पे क्या #तब्सिरा करें,
ये हादिसा तो सोच की गहराई ले गया ....
🍃🍂🍃
[5/24, 11:17 AM] Bansi Lal: एक ही शक्ल के सब चेहरे थे लेकिन फिर भी
एक चेहरे ने तो बेहद किया हैरान मुझे
🍃🍂🍃
[5/24, 8:55 PM] Bansi Lal: सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बाद
रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बाद
🍃🍂🍃
[5/24, 8:58 PM] Bansi Lal: खुशियों की सही क़ीमत उसी को पता होती है ,
जिसके पास खुशियों की दौलत बहुत कम होती है।।
🍂🍃🍂
[5/24, 8:58 PM] Bansi Lal: समेट लेगा वो अपनी कुशादा बाँहों में
जो गिर रहे हैं इसी आसरे पे गिरते हैं
🍃🍂🍃
[5/24, 8:59 PM] Bansi Lal: ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं
तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी
🍂🍃🍂
[5/24, 9:00 PM] Bansi Lal: इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ
कहीं ऐसा न हो जाए कहीं ऐसा न हो जाए
🍃🍂🍃
[5/24, 9:02 PM] Bansi Lal: मुद्दतें हुईं अब तो जल के आशियाँ अपना
आज तक ये आलम है रौशनी से डरता हूँ
🍂🍃🍂
कहानी:
🐿एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करती थी❗
गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के भी खूब खुश थी❗
क्यों कि उसके मालिक, जंगल के राजा शेर ने उसे दस बोरी अखरोट देने का वादा कर रखा था❗
गिलहरी काम करते करते थक जाती थी तो सोचती थी , कि थोडी आराम कर लूँ , वैसे ही उसे याद आता कि शेर उसे दस बोरी अखरोट देगा❗
गिलहरी फिर काम पर लग जाती❗
गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते देखती थी, तो उसकी
भी इच्छा होती थी कि मैं भी खेलूं , पर उसे अखरोट याद आ जाता, और वो फिर काम पर लग जाती❗
*ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था, शेर बहुत ईमानदार था❗*
ऐसे ही समय बीतता रहा ....
एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट दे कर आज़ाद कर दिया❗
*गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने लगी कि अब अखरोट मेरे किस काम के❓*
पूरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस गये, इन्हें खाऊँगी कैसे❗
*यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है❗*
इन्सान अपनी इच्छाओं का त्याग करता है,
पूरी ज़िन्दगी नौकरी, व्योपार, और धन कमाने में बिता देता है❗
*60 वर्ष की उम्र में जब वो सेवा निवृत्त होता है, तो उसे उसका जो फन्ड मिलता है, या बैंक बैलेंस होता है, तो उसे भोगने की क्षमता खो चुका होता है❗*
तब तक जनरेशन बदल चुकी होती है,
परिवार को चलाने वाले बच्चे आ जाते है❗
क्या इन बच्चों को इस बात का अन्दाजा लग पायेगा की इस फन्ड, इस बैंक बैलेंस के लिये : -
*कितनी इच्छायें मरी होंगी❓*
*कितनी तकलीफें मिली होंगी❓*
*कितनें सपनें अधूरे रहे होंगे❓*
क्या फायदा ऐसे फन्ड का, बैंक बैलेंस का, जिसे पाने के लिये पूरी ज़िन्दगी लग जाये और मानव उसका
भोग खुद न कर सके❗
*इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके❗*
इस लिए हर पल को खुश होकर जियो व्यस्त रहो,
पर साथ में मस्त रहो सदा स्वस्थ रहो❗
मौज लो, रोज लो❗
नहीं मिले तो खोज लो !
BUSY पर BE-EASY भी रहो❗
Tuesday, 15 May 2018
तूफ़ान:
ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!
हम तो इस जीने के हाथों मर चले
🍃🍁🍃
हाथो में कुछ और लकीरो में कुछ और
ये ज़िन्दगी है जनाब
हमारी कुछ और , तुम्हारी कुछ और
🍁🍃🍁
भला हुआ कि कोई और मिल गया तुम सा
वरना हम भी किसी दिन तुम्हें भुला देते
🍃🍁🍃
आँधियाँ आती थीं लेकिन कभी ऐसा न हुआ
ख़ौफ़ के मारे जुदा शाख़ से पत्ता न हुआ
🍁🍃🍁
मेरी ज़िंदगी तो गुज़री तेरे हिज्र के सहारे
मेरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना
🍃🍁🍃
न मंज़िल को पता होगा न रस्तों को ख़बर होगी
मुसाफ़िर एक दिन आराम से घर बैठ जाएगा
🍁🍃🍁
जिंदगी जीने के दो रास्ते है…
भूल जाओ उन्हें जिन्हें माफ़ नहीं कर सकते…
या
माफ़ कर दो उन्हें जिन्हें भुला नहीं सकते…
🍃🍁🍃
अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की
मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई
🍁🍃🍁
मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता
दिल उस से मिला जिस से मुक़द्दर नहीं मिलता
🍃🍁🍃
"ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था
हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते"
🍁🍃🍁
मुद्दत के बाद आज उसे देख कर
इक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया
🍁🍃🍁
दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्ता है
जो किसी और का होने दे न अपना रक्खे
🍃🍂🍃
चाह कर भी तुझ तक पहुँचना है नामुमकिन...
ये किसने कर दिये रास्ते धुआं धुआं मेरे
🍃🍁🍃
कोई तुमसा भी काश तुमको मिले
मुद'आ हमको इंतक़ाम से है
🍁🍃🍁
क्या दुआ रोज़-ए-हश्र की माँगें
वहाँ पर भी यही ख़ुदा होगा
🍁🍃🍁
Love and logic never meet,
cannot meet.
Logic means the outward journey.
Love means the inward journey.
🍁🍃🍁
जो लोग मौत को ज़ालिम क़रार देते हैं,
ख़ुदा मिलाए उन्हें ज़िंदगी के मारों से...
🍁🍂🍁🍂
दुश्मनों से प्यार होता जाएगा,
🌹🍃🌹
दोस्तों को आज़माते जाइए
रवैया देख कर बेटों का, बूढ़े बाप को ख्याल आया
जब बारीश ठहर जाती है, तो छतरी बोझ लगती है
🍃🌹🍃
बरखा अपने आप में ही बाकमाल शय है
फिर इससे घबराना क्या ।
🍂🍁🍂
समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई
कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता
🍂🍁🍂
Discover yourself; otherwise you have to depend on other people’s opinions who don’t know themselves. ~ #Osho
मेरे जख्मों को हमेशा उनसे ही मोहब्बत हुई
जो शख्स नमक का कारोबार करते हैं ||
🍂🍃🍂
डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा
[8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...
-
[8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...
-
वज़ूद सबका होता है अपनी अपनी जगह l 🌞🌞🌞 सूर्य के सामने जिस दीये का कोई वजूद नहीं ⭐⭐⭐ अंधेरे के आगे तो...
-
[9:29 AM, 6/5/2023] Bansi Lal: उतना ही आगे बढ़ना जहाॅं से लौट आने की गुंजाइश हो!! [9:33 AM, 6/5/2023] Bansi Lal: ईमानदार आदमी उसे कहते हैं,...