Tuesday, 15 May 2018

सकारात्मक सोच का महत्व:

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          *_💫 !! एक प्रेरक कहानी  !! ✨_*

     _*🙇🏻‍♀ सकारात्मक सोच का महत्व! 🙇🏻‍♂*_

_एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई। ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते-टकराते बची।_

_कार चला रहा आदमी गुस्से में ऑटोवाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती उसकी थी! ऑटो चालक एक सत्संगी (सकारात्मक विचार सुनने-सुनाने वाला) था। उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गया।_

_ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा... तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया।उसने तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी थी।_

_*हमारी किस्मत अच्छी है.... नहीं तो उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में होते।*_

_ऑटो वाले ने बहोत मार्मिक जवाब दिया...... "साहब,. *बहुत से लोग गार्बेज ट्रक (कूड़े का ट्रक) की तरह होते हैं। वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं।......*_

_जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं जैसे.... क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि। जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है.... तो, वे *अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं।*_

_इसलिए .....मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह देता हूँ। क्योंकि ....अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया..... तो, मैं भी कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ-साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता रहूँगा।_

_मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है इसलिए...... जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर भुला दो।_

_*हमें यह याद रखना चाहिए* कि सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं....... *कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं!*_

_*प्रकृति के नियम:-*_

_यदि खेत में बीज न डाले जाएँ..... तो, कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है।_

_उसी तरह से...... यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं।_

_*दूसरा नियम है कि*_

_जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है।....... “सुखी” सुख बाँटता है, “दुखी” दुख बाँटता है, “ज्ञानी” ज्ञान बाँटता है," "भ्रमित भ्रम बाँटता है" और.... “भयभीत” भय बाँटता है। जो खुद डरा हुआ है वह, औरों को डराता है, दबा हुआ दबाता है, चमका हुआ चमकाता है।_

_*इसलिए.... नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर खुद को नकारात्मकता से दूर रख्खें। और जीवन में सकारात्मकता अपनाएं जी।

Thursday, 10 May 2018

बादशाह औऱ कुत्ता:

एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था । उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था ।
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कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था ।

वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था ।
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मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी ।

वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा ।

परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था ।

ऐसी स्थिति देखकर बादशाह भी गुस्से में था ।

पर, कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था ।
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नाव में बैठे दार्शनिक से रहा नहीं गया ।

वह बादशाह के पास गया और बोला - "सरकार ! अगर आप इजाजत दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ ।"

बादशाह ने तत्काल अनुमति दे दी ।

दार्शनिक ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया ।

कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा ।

उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे ।

कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया ।
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वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने में बैठ गया ।

नाव के यात्रियों के साथ बादशाह को भी उस कुत्ते के बदले व्यवहार पर बड़ा आश्चर्य हुआ ।

बादशाह ने दार्शनिक से पूछा - "यह पहले तो उछल-कूद और हरकतें कर रहा था, अब देखो कैसे यह पालतू बकरी की तरह बैठा है ?"
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*दार्शनिक बोला* -
*"खुद  तकलीफ का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति  का अहसास.. नहीं.. होता है* ।

इस कुत्ते को जब मैंने पानी में फेंक दिया तो इसे पानी की ताकत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गयी ।"

*'भारत' में रहकर*
*'भारत' को गाली देने वाले*
*कुत्तों.... के लिए समर्पित*

Wednesday, 9 May 2018

सो जाता है फ़ुटपाठ पे अख़बार बिछा कर

 सो जाता है फ़ुटपाठ पे अख़बार बिछा कर

मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाता
🍁🍃🍁
मैं भी पागल तुझे मांगने को चली थी

आंधियों को दुपट्टे से बांधने को चली थी
🍁🍃🍁

तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें

तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें

हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
🍁🌹🍁
तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें

हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
🍃🌹🍃
ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें….!!

ख़्वाहिशें दफ़न करे,
या चादर बड़ी करें….!!
🍁🌹🍁
 वो आज पूछते हैं, हैसियत मेरी मुझसे~

जिन्होनें लूटा मुझे खुली तिजोरी समझकर !
🌹🍃🌹
कोई तो सूद चुकाए, कोई तो जिम्मा ले,

उस इंकलाब का,जो अब तक उधार सा है
🍃🍁🍃
गिरने दो तुम मुझे मेरा साग़र संभाल लो

इतना तो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ
🍃🍁🍃
कह दो हर वो बात जो जरुरी है कहना, क्योंकि....

कभी-कभी जिन्दगी भी बेवक्त पूरी हो जाती है....
🍁🌹🍁
छोटी-छोटी बातें करके बड़े कहाँ हो जाओगे,

पतली गलियों से निकलो तो खुली सड़क पर आओगे
🍃🍁🍃
 छाँव में गौतम की क्या बैठे

थोड़े थोड़े हम भी ज्ञानी हो गए
🍁🍃🍁

फिजूल बातों पे सभी करते हैं वाह-वाह!

फिजूल बातों पे सभी करते हैं वाह-वाह!

अच्छी बातों के लिये अब जुबान कौन रखता है
🍁🍃🍁
 फिजूल बातों पे सभी करते हैं वाह-वाह!

अच्छी बातों के लिये अब जुबान कौन रखता है
🍁🍃🍁
 इक तेरे लम्स की ख़ुशबू को पकड़ने के लिए

तितलियाँ हाथ से हम छोड़ दिया करते थे
🍁🍃🍁
लम्स: छुवन( Touch)
 हवा-ए-शब से कहो आए फिर बुझाने को..

चराग़ हम ने सर-ए-शाम फिर जलाया है !
🍃🍁🍃
ऊपर से ज़ख़्म-ए-हिज्र को तो हम ने भर दिया

अंदर से कैफ़ियत तो मगर मातमी रही
🍃🍁🍃
 कैफ़ियत: स्थिति
कितना दुश्वार था दुनिया ये हुनर आना भी

तुझ से ही फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी

काश तू सिर्फ़ मेरा होता,

 काश तू सिर्फ़ मेरा होता,

या फिर मिला ही ना होता...
🍃🍁🍃
उनका ज़िक्र, उनकी तमन्ना, उनकी याद,

वक्त कितना कीमती है आज कल...
🍁🍃🍁
देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे

इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे
🍁🍃🍁
हमारे ऐब ने बे-ऐब कर दिया हम को

यही हुनर है कि कोई हुनर नहीं आता
🍃🍁🍃

ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!

ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!

हम तो इस जीने के हाथों मर चले
🍃🍁🍃
 हाथो में कुछ और लकीरो में कुछ और

ये ज़िन्दगी है जनाब
हमारी कुछ और , तुम्हारी कुछ और

🍁🍃🍁
 भला हुआ कि कोई और मिल गया तुम सा

वरना हम भी किसी दिन तुम्हें भुला देते
🍃🍁🍃
 आँधियाँ आती थीं लेकिन कभी ऐसा न हुआ

ख़ौफ़ के मारे जुदा शाख़ से पत्ता न हुआ
🍁🍃🍁
 मेरी ज़िंदगी तो गुज़री तेरे हिज्र के सहारे

मेरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना
🍃🍁🍃

डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

 [8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...