Thursday, 5 April 2018

Bahane:

जैसे तुझे आते हैं न आने के बहाने

ऐसे ही किसी रोज़ न जाने के लिए आ
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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली

ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने..
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अब तो मुमकिन है किस्मत का सितारा चमके

मैंने कुंचल दिए है अपने ख़्वाबों के चाँद
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समय गूंगा नहीं, बस मौन है....
वक्त पर बताता है, किसका कौन है....
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सच की हालत किसी तवायफ़ जैसी है,

तलबगर बहुत हैं तरफ़दर कोई नहीं…
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बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता

जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता
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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,

अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
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एक मैं ने ही उगाए नहीं ख़्वाबों के गुलाब

तू भी इस जुर्म में शामिल है मेरा साथ न छोड़
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जिन से मिल कर ज़िंदगी से इश्क़ हो जाए वो लोग

आप ने शायद न देखे हों मगर ऐसे भी हैं
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रास्ता सोचते रहने से किधर बनता है
सर में सौदा हो तो दीवार में दर बनता है

‏हम ने सच्चाई की हर बार हिमायत की है
हम को इस भूल का ख़म्याज़ा तो भरना होगा
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मैं अहल* तो नहीं हूँ कि देखे कोई मगर

दुनिया मुझे भी देख तेरा आइना हूँ मैं

*योग्य
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हम भी तारीफ़ कर ही देते उड़ानों की तेरी,

ज़मीं पे तुमको मगर पांव भी तो रखने हों।
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Wednesday, 4 April 2018

Sukh ki Parchae:

                   *सुखों की परछाई*
                    

एक रानी अपने गले का हीरों का हार
निकाल कर खूंटी पर टांगने वाली
ही थी कि एक बाज आया और झपटा
मारकर हार ले उड़ा.
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चमकते हीरे देखकर बाज ने सोचा कि खाने
की कोई चीज हो. वह एक पेड़ पर जा
बैठा और खाने की कोशिश करने लगा.
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हीरे तो कठोर होते हैं. उसने चोंच मारा तो दर्द से
कराह उठा. उसे समझ में आ गया कि यह उसके काम की चीज नहीं. वह हार को
उसी पेड़ पर लटकता छोड़ उड़ गया.
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रानी को वह हार प्राणों सा प्यारा था. उसने राजा से कह दिया कि हार का तुरंत पता लगवाइए वरना वह खाना- पीना छोड़ देगी. राजा ने कहा कि दूसरा हार बनवा देगा लेकिन उसने जिद पकड़ ली कि उसे वही हार चाहिए.
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सब ढूंढने लगे पर किसी को हार मिला ही
नहीं. रानी तो कोप भवन में
चली गई थी. हारकर राजा ने यहां तक
कह दिया कि जो भी वह हार खोज निकालेगा उसे वह आधे राज्य का अधिकारी बना देगा.
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अब तो होड़ लग गई. राजा के अधिकारी और प्रजा सब आधे राज्य के लालच में हार ढूंढने लगे.
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अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा. हार दिखाई दे रहा था, पर उसमें से बदबू आ रही थी लेकिन राज्य के लोभ में एक सिपाही
कूद गया.
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बहुत हाथ-पांव मारा, पर हार नहीं मिला. फिर सेनापति ने देखा और वह भी कूद गया. दोनों को देख कुछ उत्साही प्रजा जन भी कूद गए. फिर
मंत्री कूदा.
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इस तरह जितने नाले से बाहर थे उससे ज्यादा नाले के भीतर खड़े उसका मंथन कर रहे थे. लोग आते रहे और कूदते रहे लेकिन हार मिला किसी को नहीं.
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जैसे ही कोई नाले में कूदता वह हार दिखना बंद हो जाता. थककर वह बाहर आकर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता.
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आधे राज्य का लालच ऐसा कि बड़े-बड़े ज्ञानी, राजा के प्रधानमंत्री सब कूदने को तैयार बैठे थे. सब लड़ रहे थे कि पहले मैं नाले में कूदूंगा तो पहले मैं. अजीब सी होड़ थी.
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इतने में राजा को खबर लगी. राजा को भय हुआ कि आधा राज्य हाथ से निकल जाए, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें ? राजा भी कूद गया.
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एक संत गुजरे उधर से. उन्होंने राजा, प्रजा, मंत्री, सिपाही सबको कीचड़ में सना देखा तो
चकित हुए.
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वह पूछ बैठे- क्या इस राज्य में नाले में कूदने की
कोई परंपरा है ? लोगों ने सारी बात कह सुनाई.
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संत हंसने लगे, भाई ! किसी ने ऊपर भी
देखा ? ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है.
नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी
परछाई है. राजा बड़ा शर्मिंदा हुआ.
हम सब भी उस राज्य के लोगों की तरह
बर्ताव कर रहे हैं. हम जिस सांसारिक चीज में
सुख-शांति और आनंद देखते हैं दरअसल वह उसी हार की तरह है जो क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है.
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हम भ्रम में रहते हैं कि यदि अमुक चीज मिल जाए
तो जीवन बदल जाए, सब अच्छा हो जाएगा. लेकिन यह सिलसिला तो अंतहीन है.
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सांसारिक चीजें संपूर्ण सुख दे ही
नहीं सकतीं. सुख शांति हीरों
का हार तो है लेकिन वह परमात्मा में लीन होने से
मिलेगा. बाकी तो सब उसकी परछाई है⚡

Tuesday, 3 April 2018

आसमान:


वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया ,
इतनी आवाज़ें तुझे दीं ,   कि गला बैठ गया ,

दुश्मन हो तो इश्क़ जैसा,
सीधा दिल पर वार करे..

जीने की आरज़ू में जो मरते हैं सारी उम्र
शायद हयात नाम इसी मरहले का है

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें,
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं

वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा,
किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा


Sunday, 1 April 2018

गुमराह:

मंज़िलों से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग,

हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता

मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द को जाने कौन,

आवाज़ों के बाज़ार में
ख़ामोशी पहचाने कौन।

उस तरफ़ वो जो नज़र पड़ता है
रास्ते में मिरा घर पड़ता है

आप तो मश्क़ किया करते हैं
और हर तीर इधर पड़ता है
उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा
बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले

फरेबी हम  तेरी  बातों  के  फन से खूब वाकिफ हैं
कसम खा के जो कहता है वही झूठी निकलती है

याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है

अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मेरे दोस्त

शहर में आ कर पढ़ने वाले भूल गए
किस की माँ ने कितना ज़ेवर बेचा था

अब भी सूने मन-आँगन में याद के पंछी उड़ते हैं
अब भी शामें सजती हैं याँ अब भी मेला लगता है

लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर
तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है

हम अक्सर खेल में हारे हैं उससे इस तरह भी
वहीं  पर  ढूंढते  थे,  वो  जहाँ  होता  नहीं  था

क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया
उम्र-भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

Saturday, 31 March 2018

तन्हाई:

तन्हाई इस क़दर रास आ गयी कि,

अपना साया भी साथ हो तो भीड़ सी लगती है

ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें, .. .. ख़्वाहिशें दफ़न करें, या चादर बड़ी करें

किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी इतनी कसीली बात लिखूँ,
शेर की मैं तहज़ीब निबाहूँ या अपने हालात लिखूँ

यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है

सब कुछ ख़ुदा से मांग लिया, उन्हें माँगने के साथ
उठते नहीं है मेरे हाथ, अब इस दुआ के बाद ।

अब भी सूने मन-आँगन में याद के पंछी उड़ते हैं
अब भी शामें सजती हैं याँ अब भी मेला लगता है

लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर
तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है

तू अपने जैसा अछूता खयाल दे मुझको,

मैं तेरा अक्स हूँ अपना जमाल दे मुझको

Saturday, 17 March 2018

जिंदगी 3:

सफ़र में अचानक सभी रुक गए

अजब मोड़ अपनी कहानी में था
🌹🍃🌹
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात है
🌹🍃🌹
ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं

पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
🌹🍃🌹
कैसे उन्हें भुलाऊँ मोहब्बत जिन्हों ने की

मुझ को तो वो भी याद हैं नफ़रत जिन्हों ने की
🌹🍃🌹
सफ़र में अचानक सभी रुक गए

अजब मोड़ अपनी कहानी में था
🌹🍃🌹

जिंदगी 2:

"विषम परिस्थितियों के कठोर प्रहारों से ही चरित्र का निर्माण होता है। "
🌹💐🌹
"फूल की चाह भी है तुमको, और दामन में काँटा भी मंज़ूर नही...!"
💐🌹💐
जो बच्चे बचपन में तितली पकड़न में जुटे रहते है

बड़े हो कर सोचते हैं चिरिया पकड़ना भी उतना सहल है |
🌹💐🌹
हमने सोचा के दो चार दिन की बात होगी लेकिन .

तेरे ग़म से तो उम्र भर का रिश्ता निकल आया .
🌹💐🌹
फैसला तुमको भूल जाने का, इक नया ख़्वाब है दीवाने का |

हौसला कम किसी में होता है,जीत कर खुद ही हार जाने का ||
🌹💐🌹
सोचा किया मैं हिज्र की दहलीज़ पे बैठा

सदीयों में उतर जाता है लम्हों का सफर क्यूँ
🌹💐🌹
बताने वाले वहीं पर बताते हैं मंज़िल

हज़ार बार जहाँ से गुज़र चुका हूँ मैं
🌹💐🌹
गुनगानाना तो तकदिर में लिखा कर लाये थे

खीलखीलाना दोस्तों ने तोहोफे में दे दिया
🌹💐🌹
बेवफ़ाई तो सब करते हैं,

आप तो समझदार थे, कुछ नया करते...

🌹💐🌹
तेरी आँखों के लिए इतनी सज़ा काफ़ी है

आज की रात मुझे ख़्वाब में रोता हुआ देख
🌹💐🌹
रोज़ इस शहर में इक हुक्म नया होता है

कुछ समझ में नहीं आता की क्या होता है
🌹💐🌹
देर से गूँजते हैं सन्नाटे

जैसे हम को पुकारता है कोई
🌹💐🌹
ख़ुद उसका रंग पीछा कर रहे हैं

कहीं देखी है ऐसी सादगी क्या
🌹🌺🌹
एक ग़ुबार दिल में रख कर बैठा हूँ
एक तुफान भी अँदर समेटे बैठा हूँ
ना छेड़ो दिल के तार कोई अब के

कुछ आवाज़ों को दबाकर बैठा हूँ
🌺🌹🌺
तेरे जाने के बाद,
उस चिठ्ठी की तरह सफ़र में है #ज़िन्दगी,

जिसे बग़ैर पता लिखें रवाना कर दिया गया हो...!!!
🌹💐🌹
अपने हर इक लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा

उसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा 
💐🌹💐

डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

 [8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...