Wednesday, 8 November 2017

Kimat Buland :

इंकार कर रहा हूँ तो क़ीमत बुलंद है

बिकने पे आ गया तो गिरा देंगे दाम लोग
💐💐🙏🙏🙏💐💐
मैं एक ज़र्रा बुलंदी को छूने निकला था

हवा ने थम के ज़मीं पर गिरा दिया मुझ को
💐🌺💐
ऐसा कहाँ कि शहर के मंज़र बदल गए,

मंज़र वही हैं सिर्फ़ सितमगर बदल गए...

💐🌺💐
साहिल से सुना करते हैं लहरों की कहानी
ये ठहरे हुए लोग बग़ावत नहीं करते
💐🌺💐

Saturday, 4 November 2017

Sukarat :

#भीतर_के_मैं_का_मिटना_ज़रूरी_है 🌿
सुकरात समुन्द्र तट पर टहल रहे थे. उनकी नजर तट पर खड़े एक रोते बच्चे पर पड़ी. उसके पास गए और प्यार से बच्चे के सिर पर हाथ फेरकर पूछा-''तुम क्यों रो रहे हो?''

लड़के ने कहा- ''ये जो मेरे हाथ में प्याला है मैं उसमें इस समुन्द्र को भरना चाहता हूँं,पर यह मेरे प्याले में समाता ही नहीं...,''

बच्चे की बात सुनकर सुकरात विस्माद में चले गये और स्वयं रोने लगे. अब पूछने की बारी बच्चे की थी.

बच्चा कहने लगा- आप भी मेरी तरह रोने लगे पर आपका प्याला कहाँ है?'
सुकरात ने जवाब दिया- बालक, तुम छोटे से प्याले में समुन्द्र भरना चाहते हो, मैं अपनी छोटी सी बुद्धि में सारे संसार की जानकारी भरना चाहता हूँ. आज तुमने सिखा दिया कि समुन्द्र प्याले में नहीं समा सकता. मैं व्यर्थ ही बेचैन रहा.''

यह सुनके बच्चे ने प्याले को दूर समुन्द्र में फेंक दिया और बोला- 'सागर अगर तू मेरे प्याले में नहीं समा सकता तो मेरा प्याला तो तुम्हारे में समा सकता है.'

इतना सुनना था कि सुकरात बच्चे के पैरों में गिर पड़े और बोले- बहुत कीमती सूत्र हाथ में लगा है. हे परमात्मा आप तो सारा का सारा मुझ में नहीं समा सकते पर मैं तो सारा का सारा आपमें लीन हो सकता हूँ.

ईश्वर की खोज में भटकते सुकरात को ज्ञान देना था तो भगवान उस बालक में समा गए. सुकरात का सारा अभिमान ध्वस्त कराया. जिस सुकरात से मिलने के सम्राट समय लेते थे वह सुकरात एक बच्चे के चरणों में लोट गए थे. ईश्वर जब आपको अपनी अनुकंपा में लेते हैं तब आपके अंदर का मैं सबसे पहले मिटता है. शायद मैंने उलटी बात कह दी. जब आपके अंदर का "मैं" मिटता है तभी ईश्वर की अनुकंपा होती है.

Friday, 3 November 2017

Aaj ka vichar :

वो बख़्शे उजाले किसी सुब्ह को

कोई शाम रौशन सुहानी करे
💐🌺💐
सुनी हिकायत-ए-हस्ती तो दरमियाँ से सुनी

न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
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हज़ार बार ज़माना इधर से गुज़रा है

नई नई सी है कुछ तेरी रहगुज़र फिर भी
💐🌺💐
रिश्ता कुछ यूँ उनसे बढने लगा...

हम उन्हें लिखने लगे और वो हमें पढने लगा...

🌺💐🌺
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर हो छुपायें कैसे,

तेरी मर्ज़ी के मुताबिक ऩज़र आयें कैसे
💐🌺💐
वक्त के साथ गर न चल पाए,

भीड़ पीछे की, रौंद डालेगी..!

🌺💐🌺
जो हाथ बढ़ाकर भी “कोशिश” न मयस्सर हो

हाथों को वो फैलाकर हासिल नहीं हो सकता
💐🌺💐
गर कुछ भी ख़बर होती अंजाम-ए-गुलिस्ताँ की

हम अपने नशेमन को ख़ुद आग लगा देते
🌺💐🌺
बस यही सोचकर किसी से शिकवा ना किया मैंने...

कि अपनी जगह हर इंसान सही हुआ करता है...
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घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है,

पहले यह तय हो कि इस घर को बचायें कैसे
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उम्र भर सीखते रहे लहरों से लड़ने का हुनर,

मालूम ना था कि कातिल तो किनारे पर हैं l

💐🌺💐

Tuesday, 31 October 2017

I am back :

मुन्तज़िर मैं ही नहीं रहता किसी आहट का

कान दरवाज़े पे उसके भी लगे रहते हैं
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हर्फ़- हर्फ़  बयाँ करता है मेरे अल्फाजों का

मेरे हर खयाल का ताल्लुक  तुझसे  है॥
💐🌺💐
कर दी ना बर्बाद फिर , अच्छी खासी शाम 

कमज़र्फों के हाथ में , और दीजिये जाम
🌺💐🌺
फिर से कर दे कोई सजा मुकर्रर

या इंतिहा कर दे इस कशमकश  की॥
💐🌺💐
आदत बहुत बुरी है कि,, आदत बना लेते है हम

मुमकिन होता नहीं जो,, वो चाहत बना लेते है हम॥
🌺💐🌺
गिरना ही था जो आपको.. तो सौ मक़ाम थे.,

ये क्या किया.. कि निगाहों से गिर कर तमाशा बन गए…
💐🌺💐
तुम हो शामिल, बस तब तक महफ़िल चलेगी,

उसके बाद, बस कुछ लोग रहेंगे और भीड़ दिखेगी..
🌺💐🌺
मेरे घर से मयखाना इतना करीब ना था  ऐ दोस्त।।।

तु दुर होता गया और मयखाना करीब आ गया।।।
💐🌺💐

Sunday, 29 October 2017

Chalan to banta hai:

जिस रफ्तार से तू निकल रही है ना जिंदगी....

एक चालान तो तेरा भी बनता है....
🎋🌹🎋
किरदार की अज़मत को गिरने न दिया हमने,

धोखे तो बहुत खाए लेकिन धोखा न दिया हमने।
💐🌺💐
एक उम्र वो थी कि, जादू पर भी यक़ीन था;

एक उम्र ये है कि, हक़ीक़त पर भी शक़ है!

💐🌺💐

Monday, 16 October 2017

Best example to serve:

*मेरे हृदय को छू गई...!*

मैं पैदल वापस घर आ रहा था। रास्ते में एक बिजली के खंभे पर, एक कागज लगा हुआ था। पास जाकर देखा, लिखा था --

*कृपया पढ़ें -- "इस रास्ते पर मैंने कल एक 50 का नोट गंवा दिया है । मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, कृपया इस पते पर दे सकते हैं...!"*

यह पढ़ कर पता नहीं क्यों, उस पते पर जाने की इच्छा हुई। वहाँ जाकर आवाज लगाया, तो एक वृद्धा लाठी के सहारे धीरे-धीरे बाहर आई। मुझे मालूम हुआ, कि वह अकेली रहती है। उसे ठीक से दिखाई नहीं देता।

"माँ जी", मैंने कहा -- "आपका खोया हुआ 50 मुझे मिला है, उसे देने आया हूँ।"

यह सुन वह वृद्धा रोने लगी और बोली -- "बेटा ! अभी तक करीब 50-60 व्यक्ति, मुझे 50-50 दे चुके हैं। मै पढ़ी-लिखी नहीं हूँ। ठीक से दिखाई नहीं देता। पता नहीं कौन, मेरी इस हालत को देख, मेरी मदद करने के उद्देश्य से, लिख गया है ?"

बहुत कहने पर माँ जी ने पैसे तो रख लिए। पर एक विनती की -- "बेटा, वह मैंने नहीं लिखा है। किसी ने मुझ पर तरस खाकर, लिखा होगा। जाते-जाते उसे फाड़ कर फेंक देना बेटा।"

मैनें हाँ कहकर टाल तो दिया, पर मेरी अंतरात्मा ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया, कि उन 50-60 लोगों से भी "माँ" ने यही कहा होगा। पर किसी ने भी नहीं फाड़ा।

*मेरा हृदय उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता से भर गया। जिसने इस वृद्धा की सेवा का उपाय ढूँढा।सहायता के तो बहुत से मार्ग हैं , पर इस तरह की सेवा, मेरे हृदय को छू गई और मैंने भी उस कागज को फाड़ा नहीं...!*

Saturday, 14 October 2017

Interview:

एक बार एक इंटरव्यू में नसीरुद्दीन ने कहा कि अमिताभ बच्चन का सार्थक सिनेमा में खास योगदान नहीं रहा क्योंकि वो विशुद्ध व्यावसायिक अभिनेता हैं।

इसके बाद एक पत्रकार ने अमिताभ बच्चन को यह बात बताई और उनकी प्रतिक्रिया चाही।
बच्चन ने कहा" जब नसीरुद्दीन शाह के जैसा अंतर राष्ट्रीय अभिनेता कुछ कहता है तो आत्म मंथन करना चाहिये,प्रतिक्रिया नहीं देना चाहिये "

एक दफा गुलज़ार से किसी ने उनके पांच सबसे पसंदीदा गीतकारों के नाम पूछे।
गुलज़ार ने पांच गीतकार गिनवा दिये, उसमे जावेद अख्तर का नाम नहीं था।

फिर क्या था एक पत्रकार ने ये बात जावेद अख्तर को बताई और प्रतिक्रिया चाही।
जावेद अख्तर ने कहा"इस बात पर बस मैं ये कह सकता हूँ कि गुलज़ार साहब की लिस्ट में जगह पाने के लिए मुझे अभी और मेहनत करना होगा  "
यही सफलता की कुन्जी है, प्रतिक्रिया आत्म कल्याण के लिए ही हो, प्रतिशोध के लिए नहीं !
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डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

 [8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...