Thursday, 26 April 2018

Dog in a boat:

एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था।

उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था।

कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था।

वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था।

मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी।

वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा।

परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था।

ऐसी स्थिति देखकर बादशाह भी गुस्से में था, पर कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था।

नाव में बैठे दार्शनिक से रहा नहीं गया।

वह बादशाह के पास गया और बोला : "सरकार। अगर आप इजाजत दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ।"

बादशाह ने तत्काल अनुमति दे दी।

दार्शनिक ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया।

कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा।

उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे।

कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया।

वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने में बैठ गया।

नाव के यात्रियों के साथ बादशाह को भी उस कुत्ते के बदले व्यवहार पर बड़ा आश्चर्य हुआ।

बादशाह ने दार्शनिक से पूछा : "यह पहले तो उछल-कूद और हरकतें कर रहा था। अब देखो, कैसे यह पालतू बकरी की तरह बैठा है ?"

दार्शनिक बोला : "खुद तकलीफ का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति का अहसास नहीं होता है। इस कुत्ते को जब मैंने पानी में फेंक दिया तो इसे पानी की ताकत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गयी।"

*'भारत' में रहकर 'भारत' को गाली देने वाले कुत्तों के लिए समर्पित।*

Wednesday, 25 April 2018

House Wife:

गृहिणी

कई साल पहले एक बड़े कॉर्पोरेट हाउस ने बेंगलोर में *मैनेजमेंट गुरुओं* का एक सम्मेलन कराया था।

उसमे एक सवाल पूछा गया था।

*आप सफलतम मैनेजर किसे मानते हैं?*

विशेषज्ञों ने...

रोनाल्ड रीगन से नेल्सन मंडेला तक,

चर्चिल से गांधी तक,

टाटा से हेनरी फोर्ड तक,

चाणक्य से बिस्मार्क तक,

और न जाने कितने और नाम सुझाये।

पर ज्यूरी ने *कुछ और ही सोच* रखा था।

*सही उत्तर था* सफलतम प्रबंधक है...

*"एक आम गृहिणी ।"*

एक गृहिणी परिवार से किसी का *ट्रांसफर* नहीं कर सकती।

किसी को *सस्पेंड* नहीं कर सकती।

किसी को *टर्मिनेट* नहीं कर सकती।

और,

किसी को *अपॉइंट* भी नहीं कर सकती।

परन्तु फिर भी *सबसे काम करवाने की क्षमता* रखती है।

*किससे*, *क्या* और *कैसे* कराना है...

कब *प्रेम के राग* में *हौले से काम पिरोना* है...

और कब *राग सप्तक* पर *उच्च स्वर* में *भैरवी सुना क*र जरूरी कामों को अंजाम तक पहुंचाना है...

उसे पता होता है।

मानव संसाधन प्रबंधन का इससे बेहतर क्या उदहारण हो सकता है?

बड़े बड़े उद्योगों में भी कभी कभी इसलिए काम रुक जाता है क्योंकि *जरूरी फ्यूल* नहीं था या कोई *स्पेयर पार्ट* उपलब्ध नहीं था या कोई *रॉ मटेरियल* कम पड़ गया।

पर किसी गरीब से गरीब घर मे भी *नमक* _कम नहीं पड़ता_।

शायद बहुत याद करने पर भी आप को *वह दिन याद न आ पाए* जिस दिन *मां आपको खाने में* सिर्फ इसलिए कुछ नहीं दे पाई कि *बनाने को कुछ नही था* या *गैस खत्म* हो गई थी या *कुकर का रिंग* खराब हो गया था।

हर कमोबेशी और हर समस्या का *विकल्प* एक गृहिणी रखती है।

वो भी *बिल्कुल खामोशी* से।

*सामग्री प्रबंधन* एवं *संचालन*, संधारण प्रबंधन का इससे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता है ?

काम वाली बाई का बच्चा दुर्घटना का शिकार हो जाता है।

डॉक्टर बड़ा खर्च बता देता है, बाकी सब बगलें झांकने लगते हैं।

लेकिन वो फटाफट पुराने संदूको में छुपा कर रखे बचत के पैसे निकालती है।

कुछ गहने गिरवी रखती है।

कुछ घरों से सिर्फ साख के आधार पर उधार लेती है।

पर *पैसे का इंतजाम* कर ही लाती है।

*संकटकालीन अर्थ प्रबंध* का इससे बेहतर क्या उदाहरण हो सकता है?

निचले इलाकों में बेमौसम बारिश में घर मे पानी भरने लगे या *बिना खबर* अचानक चार मेहमान आ जाएं।

सब के लिए *आपदा प्रबंधन* की योजना रहती है उसके पास।

और...

सारे प्रबंधन के लिए पास में है बस कुछ आंसू और कुछ मुस्कान।

लेकिन...

जो सबसे बड़ी चीज होती है...

वो है...

जिजीविषा*, *समर्पण* और *प्रेम*।

सफल गृहिणी का *सबसे बड़ा संबल* होता है *सब्र*।

वही सब्र...

जिसके बारे में किसी ने बहुत सटीक कहा है...

*सब्र का घूंट दूसरों को पिलाना*
*कितना आसान लगता है*।

*ख़ुद पियो तो*,
*क़तरा क़तरा ज़हर लगता है*

Saturday, 21 April 2018

Pahali:

पूछने से पहले ही सुलझ जाती हैं सवालों की गुत्थियां

कुछ आँखें इतनी हाजिर जवाब होती हैं।
🍃🌹🍃
तेरी ख़ुशबू का पता करती है,

मुझ पे एहसान हवा करती है
🍃🌹🍃
थोड़ी थोड़ी गुफ़्तगू दोस्तों से करते रहिये....

जाले लग जाते है अक्सर बंध मकlनो में....
🍃🌹🍃
इक नाम क्या लिखा तेरा साहिल की रेत पर

फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही
🍃🌹🍃
बहुत अंदर तक बसा था वोह शख़्स मेरे में,

उसे भूलने के लिए बड़ा वक़्त चाहिए।
🍃🌹🍃
कोई नहीं है देखने वाला तो क्या हुआ

तेरी तरफ़ नहीं है उजाला तो क्या हुआ
🍃🌹🍃
क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं

वो तो मिलने को मुलाक़ात समझता ही नहीं
🍃🌹🍃
डाला है बेख़ुदी ने अजब राह पर मुझे,

आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे
🍃🌹🍃
अजीब तजरबा था भीड़ से गुज़रने का

उसे बहाना मिला मुझ से बात करने का
🍃🌹🍃
यक़ीन किस पे करें किस को दोस्त ठहराएँ,

हर आस्तीन में पोशीदा कोई ख़ंजर है...
🍃🌹🍃
"Patience is, when you're supposed to be mad, but you choose to understand."
🌹🍃🌹

Body:

ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा मैं

सज्दे में नहीं था आप को धोका हुआ होगा

~दुष्यंत कुमार
साथ भी छोड़ा तो कब, जब सब बुरे दिन कट गए

ज़िंदगी तू ने कहाँ आ कर दिया धोका मुझे
🍃🌹🍃
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ

ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
🍃🌹🍃
सफ़र में जब निकल आये हो तो इतनी शिकायत क्यों

सड़क थोड़ी-बहुत  तो  बीच  में  तिरछी  निकलती है
🍃🌹🍃
झुक कर सलाम करने में क्या हर्ज है मगर

सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े..
🍃🌹🍃
दस्तार-turban

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल

कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
🍃🌹🍃
इस दौर में इंसान भी, ढूँढे नहीं मिलता...

इक तुम हो, मेरे यार- खुदा ढूँढ रहे हो...!
🍃🌹🍃
आज फिर उनसे मुलाक़ात हुई,

आज फिर खुदा से इक और शिकायत हुई...

🍃🌹🍃

Chirag:

रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग

कम से कम रात का नुकसान बहुत करता है
🌹🍃🌹
मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या न आऊँ

मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
🍃🌹🍃
हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके,

तुम ने हमें भुला दिया हम न तुम्हें भुला सके...
🍃🌹🍃
If 5 seconds of smile can make a photograph more beautiful. Then just imagine if you keep always smiling how beautiful your life will be. So keep smiling !!!!!
बंद दरवाज़ों को जब जब दस्तकें सहलायेंगी,

भूली बिसरी सारी बातें देर तक याद आयेंगी
🍃🌹🍃

Be happy :

*सिकंदर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से मानव अमर हो जाते हैं.!*

*काफी दिनों तक  दुनियाँ में भटकने के पश्चात आखिरकार उस ने वह जगह पा ही ली, जहाँ उसे अमृत की प्राप्ति हो*

👉 *उसके सामने ही अमृत जल बह रहा था, वह अंजलि में अमृत को लेकर पीने के लिए झुका ही था कि तभी एक बुढा व्यक्ती जो उस गुफा के भीतर बैठा था, जोर से बोला,  रुक जा, यह भूल मत करना...!’*

*बड़ी दुर्गति की अवस्था में था वह बुढा !*

*सिकंदर ने कहा, ‘तू रोकने वाला कौन...?’*

*बुढे ने उत्तर दिया, ..मैं अमृत की तलाश में था और यह गुफा मुझे भी मिल गई थी !, मैंने यह अमृत पी लिया !*
*अब मैं मर नहीं सकता, पर मैं अब मरना चाहता हूँ... !* *देख लो मेरी हालत...अंधा हो गया हूँ, पैर गल गए हैं,  *देखो...अब मैं चिल्ला रहा हूँ...चीख रहा हूँ...कि कोई मुझे मार डाले, लेकिन मुझे मारा भी नहीं जा सकता !*
*अब प्रार्थना कर रहा हूँ  परमात्मा से कि प्रभु मुझे मौत दे !*

सिकंदर  चुपचाप गुफा से बाहर वापस लौट आया, *बिना अमृत पिए !*

*सिकंदर समझ चुका था कि जीवन का आनन्द ✨उस समय तक ही रहता है, जब तक हम उस आनन्द को भोगने की स्थिति में होते हैं!*

*इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा कीजिये !*
*जितना जीवन मिला है,उस जीवन का भरपूर आनन्द लीजिये !*
❣🥀 *हमेशा खुश रहिये ?*❣🥀

*दुनियां में सिकंदर कोई नहीं, वक्त ही सिकंदर है..*

Tuesday, 17 April 2018

Umeed:


      एक घर मे पांच दिए जल रहे थे , एक दिन पहले दिए ने कहा -  'इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं ' और वह दीया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । जानते है वह दिया कौन था ?  वह दीया था उत्साह का प्रतीक ।
       यह देख दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था , कहने लगा , मुझे भी बुझ जाना चाहिए...  निरंतर शांति की रोशनी देने के बावजूद भी लोग हिंसा कर रहे है और शांति का दीया बुझ गया ।
        उत्साह और शांति के दीये बुझने के बाद , जो तीसरा दीया हिम्मत का था , वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया । उत्साह , शांति और अब हिम्मत के न रहने पर चौथे दीए ने बुझना ही उचित समझा । चौथा दीया समृद्धि का प्रतीक था । सभी दीए बुझने के बाद केवल पांचवां दीया अकेला ही जल रहा था । हालांकि पांचवां दीया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह निरंतर जल रहा था । तब उस घर मे एक लड़के ने प्रवेश किया । उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ एक ही दीया जल रहा है , वह खुशी से झूम उठा ... चार दीए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ , यह सोचकर कि कम से कम एक दीया तो जल रहा है । उसने तुरंत पांचवां दीया उठाया और बाकी के चार दीए फिर से जला दिए । जानते है वह पांचवां अनोखा दीया कौन सा था ?  वह था उम्मीद का दीया ..
         इसलिए अपने घर मे अपने मन मे हमेशा उम्मीद का दीया जलाए रखिये । चाहे सब दीए बुझ जाए लेकिन उम्मीद का दीया नही बुझना चाहिए । ये एक ही दीया काफी है बाकी सब दीयों को जलाने के लिए .... क्योंकि हमारे आज में जो उम्मीद जगती है वही उम्मीद हमारे भविष्य का निर्माण करती है ।
    " उम्मीद वक़्त का बहुत बड़ा सहारा है "
    "है उम्मीद तो हर लहर किनारा है

डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

 [8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...