Thursday, 2 February 2017

ख़ुशी:

"खुशी खराब से खराब समय में भी ढूंढी जा सकती है।
लेकिन तभी जब आप दीप जलाना याद रखें। "
🙏🏻🌺🙏🏻
"Happiness can be found even in the darkest of times. If one only remembers to turn on the light. "
🌺🙏🏻🌺
टुकड़े टुकड़े बिखर कर फिर से.. खो जायेगा कहीं फलक के अँधेरे में..

बड़ी शिद्दत से बनाया था पूरा चाँद तुझे तकने की खातिर।
🙏🏻🌺🙏🏻
लाज्मी नही के आँखो से ही देंखू तुझे...!!!

ए दोस्त.. तेरा तसव्व्वुर क्या तेरे दीदार से कम है....!!!
🌺🙏🏻🌺
ये ज़ख़्म गुलज़ार बन गये हैं ये आहें-सोज़ाँ घटा बनी है ..

ये दर्द मौज-ए-सबा हुआ है ये आग दिल की सदा बनी है
🙏🏻🌺🙏🏻
"अपने सपनों में हम एक ऐसे संसार में प्रवेश करते हैं जो पूर्णतया हमारा होता है।"
🙏🏻🌺🙏🏻

रामायण का एक प्रसंग:

*रामायण कथा का एक अंश*
जिससे हमे *सीख* मिलती है *"एहसास"* की...
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*श्री राम, लक्ष्मण एवम् सीता' मैया* चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे,
राह बहुत *पथरीली और कंटीली* थी !
की यकायक *श्री राम* के चरणों मे *कांटा* चुभ गया !

श्रीराम *रूष्ट या क्रोधित* नहीं हुए, बल्कि हाथ जोड़कर धरती माता से *अनुरोध* करने लगे !
बोले- "माँ, मेरी एक *विनम्र प्रार्थना* है आपसे, क्या आप *स्वीकार* करेंगी ?"

*धरती* बोली- "प्रभु प्रार्थना नहीं, आज्ञा दीजिए !"

प्रभु बोले, "माँ, मेरी बस यही विनती है कि जब भरत मेरी खोज मे इस पथ से गुज़रे, तो आप *नरम* हो जाना !
कुछ पल के लिए अपने आँचल के ये पत्थर और कांटे छुपा लेना !
मुझे कांटा चुभा सो चुभा, पर मेरे भरत के पाँव मे *आघात* मत करना"

श्री राम को यूँ व्यग्र देखकर धरा दंग रह गई !
पूछा- "भगवन, धृष्टता क्षमा हो ! पर क्या भरत आपसे अधिक सुकुमार है ?
जब आप इतनी सहजता से सब सहन कर गए, तो क्या कुमार भरत सहन नही कर पाँएगें ?
फिर उनको लेकर आपके चित मे ऐसी *व्याकुलता* क्यों ?"

*श्री राम* बोले- "नही...नही माते, आप मेरे कहने का अभिप्राय नही समझीं ! भरत को यदि कांटा चुभा, तो वह उसके पाँव को नही, उसके *हृदय* को विदीर्ण कर देगा !"

*"हृदय विदीर्ण* !! ऐसा क्यों प्रभु ?",
*धरती माँ* जिज्ञासा भरे स्वर में बोलीं !

"अपनी पीड़ा से नहीं माँ, बल्कि यह सोचकर कि...इसी *कंटीली राह* से मेरे भैया राम गुज़रे होंगे और ये *शूल* उनके पगों मे भी चुभे होंगे !
मैया, मेरा भरत कल्पना मे भी मेरी *पीड़ा* सहन नहीं कर सकता, इसलिए उसकी उपस्थिति मे आप *कमल पंखुड़ियों सी कोमल* बन जाना..!!"

अर्थात
*रिश्ते* अंदरूनी एहसास, आत्मीय अनुभूति के दम पर ही टिकते हैं ।
जहाँ *गहरी आत्मीयता* नही, वो रिश्ता शायद नही परंतु *दिखावा* हो सकता है ।
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इसीलिए कहा गया है कि...
*रिश्ते*खून से नहीं, *परिवार* से नही,
*मित्रता* से नही, *व्यवहार* से नही,
बल्कि...
सिर्फ और सिर्फ *आत्मीय "एहसास"* से ही बनते और *निर्वहन* किए जाते हैं।
जहाँ *एहसास* ही नहीं,
*आत्मीयता* ही नहीं ..
वहाँ *अपनापन* कहाँ से आएगा l
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*हम सबके लिए प्रेरणास्पद लघुकथा* ✍✍

Tuesday, 31 January 2017

प्रेरक कथा:

"प्रेरक कथा"...

एक मित्र नेअपनी बीवी की अलमारी खोली और एक सुनहरे कलर का पेकेट निकाला,

उसने कहा कि
"ये कोई साधारण पैकेट नहीं है..!"

उसने पैकेट खोला
और उसमें रखी बेहद खूबसूरत सिल्क की साड़ी और उसके साथ की ज्वेलरी को एकटक देखने लगा।

ये हमने लिया था 8-9 साल पहले, जब हम पहली बार न्युयार्क गए थे,
परन्तु उसने ये कभी पहनी नहीं क्योंकि वह इसे किसी खास मौके पर पहनना चाहती थी,
और इसलिए इसे बचा कर रखा था।

उसने उस पैकेट को भी दूसरे और कपड़ों के साथ अपनी बीवी की अर्थी के पास रख दिया,
उसकी बीवी की मृत्यु अभी अचानक ही हुई थी।

उसने रोते हुए मेरी और देखा और कहा-
किसी भी खास मौके के लिए कभी भी कुछ भी मत बचा के रखना,
जिंदगी का हर एक दिन खास मौका है,
कल का कुछ भरोसा नहीं है।

मुझे लगता है,
उसकी उन बातों ने मेरी जिंदगी बदल दी।

मित्रों अब मैं किसी बात की ज्यादा चिंता नहीं करता,

अब मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताता हूँ,
और काम का कम टेंशन लेता हूँ।

मुझे अब समझ में आ चुका है कि जिंदगी जिंदादिली से जीने का नाम है,
डर-डर के,
रूक-रूक के बहुत ज्यादा विचार करके चलने में समय आगे निकल जाता है,
और हम पिछड़ जाते हैं।

अब मैं कुछ भी बहुत बहुत संभाल-संभाल के नहीं रखता, हर एक चीज़ का बिंदास और भरपूर उपयोग जी भर के करता हूँ।

अब मैं घर के शोकेस में रखी महँगी क्रॉकरी का हर दिन उपयोग करता हूँ..

अगर मुझे पास के सुपर मार्केट में या नज़दीकी माॅल में मूवी देखने नए कपड़े पहन के जाने का मन है,
तो मैं जाता हूँ।

अपने कीमती खास परफ्यूम को विशेष मौकों के लिए संभाल कर बचा के नहीं रखता,
मैं उन्हें जब मर्जी आए तब उपयोग करता हूँ,

'एक दिन'
'किसी दिन'
'कोई ख़ास मौका' जैसे शब्द अब मेरी डिक्शनरी से गुम होते जा रहे हैं..।

अगर कुछ देखने,
सुनने या करने लायक है,
तो मुझे उसे अभी देखना सुनना या करना होता है।

मुझे नहीं पता मेरे दोस्त की बीवी क्या करती,
अगर उसे पता होता कि वह अगली सुबह नहीं देख पाएगी,

शायद वह अपने नज़दीकी रिश्तेदारों और खास दोस्तों को बुलाती।
शायद वह अपने पुराने रूठे हुए दोस्तों से दोस्ती और शांति की बातें करती।

अगर मुझे पता चले
कि मेरा अंतिम समय आ गया है तो क्या मैं,
इन इतनी छोटी-छोटी चीजों को भी नहीं कर पाने के लिए अफसोस करूँगा।

नहीं..

इन सब इच्छाओं को तो
आज ही आराम से पूरा कर सकता हूँ..!

हर दिन,
हर घंटा,
हर मिनट,
हर पल विशेष है,
खास है...बहुत खास है।

🌹प्यारें दोस्तों..!
जिंदगी का लुत्फ उठाइए,
आज में जिंदगी बसर कीजिये।

*क्या पता कल हो न हो*,
वैसे भी कहते हैं न कल तो कभी आता ही नहीं।

*अगर आपको ये मेसेज मिला है*,
इसका मतलब है,
*कि कोई आपकी परवाह करता है*,
केयर करता है,

*क्योंकि शायद आप भी किसी की परवाह करते हैं*,
ध्यान रखते हैं।

*अगर आप*
अभी बहुत व्यस्त हैं,
और,
इसे किसी "अपने" को बाद में या,
*किसी और दिन भेज देंगे*..

*तो याद रखिये*
कोई और दिन बहुत दूर है,
और शायद कभी आए भी नहीं..।

इसलिये
ज़िन्दगी के हर पल को
जियें जी भर के..॥💪👍🏽🇮🇳🇮🇳🎈🎈

तू झूठ बोल के आंसू निकल लेता है:

जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर

हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है
🙏🏻🌹🙏🏻

मैं इस लिए भी तेरे फ़न की क़द्र करता हूँ,

तू झूट बोल के आँसू निकाल लेता है

🙏🏻🌹🙏🏻बन्सी🙏🏻🌹🙏🏻

मंज़र ही हादसे का अजीबो ग़रीब था....
वो आग से जला जो नदी के क़रीब था....
🌹🙏🏻🌹

"किसी काम को करने के बारे में बहुत देर तक सोचते रहना अक़सर उसके बिगड़ जाने का कारण बनता है।"
🌹🙏🏻🌹
हम को ये बात समझने में भी उम्र लगी

बात तो सच्च थी मगर मुँह पे नहीं कहनी थी
🌹🙏🏻🌹

Wednesday, 25 January 2017

मोहब्बत में नज़र- अंदाज़ ज़रूरी है:

मोहब्बत में नज़र-अंदाज़ करना भी ज़रूरी है
ज़ियादा आबयारी से भी पौधा सूख जाता है

फ़ासला इतना न रखना था ख़ुदा
इस ज़मीं को आसमाँ देते हुए

जिस को तुम भूल गए याद करे कौन उस को
जिस को तुम याद हो वो और किसे याद करे
🌺🙏🏻🌺

उसे दुआओं की ज़रूरत नहीं.... उसकी बेटियाँ रोज़ उसका हाल पूछती हैं...
🌺🙏🏻🌺

"Death is so terribly final, while life is full of possibilities."
🙏🏻🌺🙏🏻

जिस को तुम भूल गए याद करे कौन उस को
जिस को तुम याद हो वो और किसे याद करे

"कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है"
🌺🙏🏻🌺

अगर तुमने मुझे लाखों में चुना है,तो मेरा भी वादा है तुमसे
कि करोडों की भींड में , खोने नही दूंगा तुमको
🌺🙏🏻🌺

*गुफ्तगू करते रहिये थोड़ी थोड़ी सभी दोस्तो से....*
*जाले लग जाते है अक्सर बंद मकानों में भी....*
🌺🙏🏻🌺

अनजाने लोग:

अनजाने लोगों को हर सू चलता फिरता देख रहा हूँ
कैसी भीड़ है फिर भी ख़ुद को तन्हा तन्हा देख रहा हूँ

इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई
हम डूब के समझे हैं दरिया तेरी गहराई

*ताश का जोकर और अपनों की ठोकर*
*अक्सर बाजी घुमा देती है*

*अपनी सहनशीलता को बढाइए*
*छोटी मोटी घटना से हताश मत होइए*

*जो चंदन घिस जाता है वह भगवान के मस्तक  पर लगाया जाता है*
*और जो नही घिसता वह तो सिर्फ मुर्दे जलाने के काम ही आता है*

घर से निकल कर जाता हूँ:

घर से निकल कर जाता हूँ मैं रोज़ कहाँ
इक दिन अपना पीछा कर के देखा जाए

जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है

मैं इस लिए भी तेरे फ़न की क़द्र करता हूँ,
तू झूट बोल के आँसू निकाल लेता है

मंज़र ही हादसे का अजीबो ग़रीब था....
वो आग से जला जो नदी के क़रीब था....

"किसी काम को करने के बारे में बहुत देर तक सोचते रहना अक़सर उसके बिगड़ जाने का कारण बनता है।"

हम को ये बात समझने में भी उम्र लगी
बात तो सच्च थी मगर मुँह पे नहीं कहनी थी

डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा

 [8:11 AM, 8/24/2023] Bansi Lal: डर हमको भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा [8:22 AM, 8/24/2023] Bansi La...